Tuesday, October 7, 2008

What Does Quran say on Jihad !!


I was going through one of the writings of Mr Asghar Ali Engineer about most discussed topic JIHAD. I found it very interesting and so like to share few interesting points. 1. Jihad does not mean war in Quran as there are other words for it like qital and harb.
2. Jihad has been used in the Quran in its root meaning i.e. to strive and to strive for betterment of society, to spread goodness (maruf) and contain evil (munkar).
3. The word Jihad occurs in the Quran 41 times though not a single verse uses it in the sense of war.
4. There are four most fundamental values in the Quran i.e. justice, benevolence, compassion and wisdom. The words compassion and mercy in their various forms occur in the Quran 335 times as against only 41 for Jihad.
5. There is no word like Jihadi in the Arabic Language. It is infact 'Mujahid' and it is used in a laudatory sense-one who devotes himself to a good cause like fighting against social evils.
The Prophet said that the " ink of a scholar is superior to the blood of the martyr" !!

Friday, August 15, 2008

India after 61 years of Independence !!

- 77% people in India live below Rs.20/- per day

- 30 crores people living below Rs.12/- per day

- 50% Children below the age of 5 are suffering from Malnutrition.

- Every year more than 1 crore people die due to non–availability of potable water.

- 30% food grain is lost every year due to mismanagement.

- To do legal things people have to do illegal things.

- We are the 74th most corrupt nation in the world.

source:http://www.brsp.org/faq.htm

Wednesday, August 6, 2008

मेरे यूरोप यात्रा की झलकियाँ: बेल्जियम तथा फ्रांस

अब हमने द हेग से ४ घंटे की दूरी पर स्थित बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स की ओर रूख किया । ब्रसेल्स स्थित नाटो मुख्यालय हमारा अगला पड़ाव था। काफी सख्त सुरक्षा जॉच के पश्चात हमने नाटो परिसर में प्रवेश किया। यहॉं पर हमे तीन प्रमुख बिंदुओं पर सम्बोधित किया गया-
१। बूचारेस्ट सम्मेलन के पश्चात नाटो का रूख,
२। भागीदार देशों तथा अन्य भागीदारों के साथ नाटों के संबंध तथा
३। नाटो की विभिन्न कार्यवाही।
नाटो की स्थापना १९४९ में हुई थी तथा वर्तमान में इसके ६० सदस्य देश है। द्वितीय विश्व युद्व के पश्चात यह पश्चिमी सैन्य संगठन बनाया गया। नाटों में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते है। विश्व में शांति की स्थापना के लिए ३० राष्ट्रों के साथ भागीदारी कर रहें है। अफगानीस्तान में शांति स्थापना करने के लिए संगठन काफी बडे क्षेत्र में कार्य रहा है। नाटो ने न सिर्फ राजनैतिक तथा सैन्य वरन बहुत से भौगोलिक समस्याओं जैसे जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे मुद्दों को गंभीरता से प्रचारित कर रहा है। अगर नाटों की तुलना संयुक्त राष्ट्र संघ से की जाए तो नाटो अधिक सख्त तथा कारगार है क्योंकि नाटो के पास निजी सैन्य क्षमता है।

ब्रसेल्स में ३ घंटे व्यतीत करने पश्चात हम अपने अगले पड़ाव दुनिया के सबसे खूबसूरत शहर फ्रांस की राजधानी पेरिस की ओर निकल पड़े । शाम होते-होते हम पेरिस में थे लेकिन तभी हमें पता चला कि अपरिहार्य कारणों से यूनेस्कों में हमारा तयशुदा मुलाकात का कार्यक्रम रद्द हो गया है । अब हमारे पास पेरिस की खूबसूरती देखने के लिए एक पूरा दिन था । शाम को शहर घूमतें हुए हमें एक भारतीय रेस्टोरेन्ट के दर्शन हुए तो हम अपनें-आप को रोक नही पाए। अंदर जाकर पता चला कि उसके संचालक पाकिस्तान के लाहौर के है। हमारा परिचय जानकर वे भी काफी प्रसन्न हुए। अपने लजीज व्यंजनों से उन्होनें हमारा मन प्रसन्न कर दिया तथा अंत में सूखें मेवे तथा सौफ खिलाना भी नही भूले। अगले दिन सुबह से हम पेरिस भ्रमण के लिए निकल पड़े। विश्व प्रसिद्व एफिल टावर, लूर संग्रहालय तथा नाटरडेम चर्च जैसी जगहों पर जाकर समय कैसे निकल गया पता ही नहीं चला। एफिल टावर में १००० फीट की ऊंचाई से पेरिस को दंेखना अद्वितीय आंनद प्रदान करता है। नीचे आने के पश्चात जगमगाते रोशनी में एफिल टावर की सुंदरता को देखकर हमारा मन प्रफुल्लित हो गया। इस नयनाभिराम वातावरण में कुछ पंजाबी भाई भारतीय चाय और समोसा बेचते मिल गए जिन्होंने हमारा मजा दुगना कर दिया। फ्रांस के लोग अंग्रेज तथा अंग्रेजी से दूर रहना पसंद करते हैं। वे बोलचाल में फ्रेंच भाषा का उपयोग करते हैं।

Tuesday, July 29, 2008

आतंकवाद की निंदा या उसका मुकाबला !!


"अहमदाबाद में हुए बम धमाको के बाद प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री ने कड़े शब्दों में निंदा की ! इससे आतंकवादी काफी डर गए होंगे !!" यह वाक्य एक न्यूज़ चैनल में एक दर्शक द्वारा भेजा गया था जिसे पढ़ कर दिमाग यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि १३० करोड़ आबादी वाले इस देश कि सुरक्षा के लिए काम कर रहे खुफिया विभाग को इन हादसों के बारे में क्या कोई पूर्व जानकारी नही होती ? गुप्तचर एजेंसी आईबी के कुल २५,००० जासूस देश के विभिन्न भागो में तैनात हैं फिर भी क्या वजह है कि आतंकवादी एक के बाद एक अलग-अलग शहरों में पूरी तैयारी के साथ यह धमाके कर रहें हैं । अभी FBI के तर्ज़ पर एक नई जाँच एजेंसी बनने के विषय में बात चल रही है लेकिन इससे कितना फायदा होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। जबकि जानकर यह मानते हैं की अभी भी हमारे खुफिया तंत्र काफ़ी सक्षम है बशर्ते उनका सही तरीके से इस्तेमाल हो। दुश्मन अब सीमा पर से हमला नही करते, वो अब हमारे देश के अन्दर ही मौजूद हैं। भारत के सभी प्रमुख शहर उनके निशाने पर है। हजारो जानो की जिम्मेदारी अब हमारे "भाग्य विधाताओ" पर हैं। अब उन्हें निंदा करने के अलावा कुछ सख्त कदम भी उठाना होगा तभी इन विनाशकारी ताकतों को मुँहतोड़ जवाब दिया जा सकता है।

Saturday, July 26, 2008

मेरे यूरोप यात्रा की झलकियाँ: नीदरलैंड (3)

नीदरलैण्ड जाना जाता है ट्यूलिप फूलों, पवन चक्की तथा जल प्रबंधन के लिए। देश का काफी बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे स्थित है जिसके कारण यहॉं जल प्रबंधन के अनूठे मिसाल देखने को मिलते है। हेंग शहर से ५० किमी की दूरी पर स्थित यूरोप के व्यस्तम बंदरगाह रोटरडैम में हमे यही दिखाने ले जाया गया। यह जगह समुद्र तल से ६ मीटर नीचे स्थित है। यूरोप मे माल वाहन के लिए जलमार्ग का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह सड़क, रेल तथा वायु मार्ग से किफायती है। बंदरगाह पर कंटेनर की जहाज पर लादने तथा निकालने का सारा तंत्र स्वचालित है। यहॉं बिना ड्राइवर के ट्राली को चलता देखकर सभी आर्श्चयचकित थे। हमारा अगला पड़ाव था हेग स्थित सेवा नेटवर्क जो कि नीदरलैण्ड की जानी मानी सामाजिक संस्था है। संस्था के निदेशक श्री राज भोन्दू ने अपने उद्बोधन में हिन्दू धर्म के नैतिक मूल्यों पर अपने तथा संस्था की निष्ठा को प्रकट किया। उन्होंने कहा कि संस्था अंहिंसा, परस्पर सम्मान तथा विश्व-शांति पर विश्वास करती है। विश्व के कई देशों में कार्यरत यह संस्था भारत में झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में १०० शालाओ का निर्माण कर रही है जिससे करीब १०,००० बच्चे लाभान्वित होंगे। अंत मे हम नीदरलैण्ड के फारेन प्रेस एसोसिएशन से पत्रकारो से रूबरू हुए जिसमें जर्मनी, अमेरीका तथा रोमानिया के प्रतिनिधि मौजूद थें। संक्षिप्त वार्तालाप में हमने वहॉं के पत्रकारिता के स्तर तथा तंत्र को समझने का प्रयास किया।
नीदरलैण्ड में सूरीनामी हिन्दू काफी संख्या में है। उन्होने विदेश में भी अपनी भारतीय संस्कृति को सहेज कर रखा हुआ है। भारत में इनकी जड़े बिहार के भोजपुर क्षेत्र में हैं तथा भोजपुरी में इनकी निपुणता है। इसी वजह से नीदरलैण्ड सरकार ने अभी कुछ ही माह पूर्व मशहूर भोजपुरी अभिनेता तथा गायक मनोज तिवारी के छाया-चित्र वाली ४० सेन्ट का डाक टिकट जारी किया।

Thursday, July 24, 2008

मेरे यूरोप यात्रा की झलकियाँ: नीदरलैंड(2)

इस प्रकार हम हेग शहर की विभिन्न जानकारिया प्राप्त कर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की ओर रवाना हुए जोकि पीस पैलेस नामक भवन में स्थित है। यहॉं पर हमें क्रोअशिया तथा सर्बिया के बीच चल रहे मामले की सुनवाई को देखने का अवसर प्राप्त हुआ । पंद्रह न्यायधिशों के बेंच के सामने दोनो पक्षों के वकीलों को जिरह करते हुए दंखना एक नया अनुभव रहा । इसके पश्चात हम इसी भवन में स्थित पीस पैलेस लायब्रेरी में गए जहॉं हमें वहॉं के निदेशक ने पीस पैलेस के संबंध मे ऐतिहासिक जानकारियॉं दी। उन्होने बताया कि लायबे्ररी की किताबों को अगर सीधी रेखा मे लगाया जाए तो उनकी लंबाई करीब १६ किमी होगी । यह सुनकर हम सभी हतप्रभ थे।
हमारे अगले दिन की शुरूआत हुई इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से। यहॉं पर हमें बहुत की जटिल सुरक्षा जॉंच से गुजरना पड़ा जिसके बाद ही हम कोर्टं परिसर मे दाखिल हो सके। इस कोर्ट में अंतराष्ट्रीय अपराधियों के मामलो की सुनवाई की जाती है। यहॉं पर वक्ताओं ने संबोधित करते हुए इसके प्रारंभ होने की वजह, इसके गठन तथा वर्तमान में चल रहे कुछ प्रकरण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । कोर्ट से हम सीधे नीदरलैण्ड़ की राजधानी एम्सटरडम के लिए रवाना हुए जहॉं हमने डच लेबर पार्टी की अंतर्राष्ट्रीय सचिव सुश्री लाफेबेर से मुलाकात की । काफी युवा होने बावजूद उनहे राजनीति का अच्छा अनुभव है। उनकी पार्टी वर्तमान में देश की सत्ता संभालने वाली गठबंधन सरकार में शामिल है। अपने उद्बोधन में उन्होंने देश की राजनीति शासन-व्यवस्था तथा समस्याओं के विषय में प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि सरकार के सामने सबसे बडी चुनौती अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा एवं संरक्षण है। इस ज्ञानवर्धक उद्बोधन के पश्चात हम सभी ने यह महसूस किया कि यहॉं के राजनितिज्ञ सरल, सादगीपूर्ण एवं अपने कार्यो के लिए अधिक जिम्मेदार है। अपने अगले मुलाकात के लिए हम काफी उत्साहित थे क्योंकि हमें मिलना था भारतीय राजदूत सुश्री नीलम सबरवाल से। जैसे ही हम द हेग स्थित उनके दूतवास में पहुचे उन्होंने गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया। वार्तालाप के दौरान उन्होंने भारत तथा नीदरलैण्ड के बीच विभिन्न व्यापारिक तथा राजनैतिक समझौतो के बारे मे बताया। हम सभी को यह जानकर अत्यंत खुशी हुई की नीदरलैण्ड सरकार ने इस वर्ष भारत-पर्व मनाने का निर्णय लिया है। वार्तालाप के पश्चात हमने भारतीय व्यन्जनों का भी आनंद लिया जोकि सभी के लिए एक सुखद अनुभव रहा ।

Tuesday, July 22, 2008

मेरे यूरोप यात्रा की झलकियाँ : नीदरलैंड !! (Glimpses of my Europe Tour: Netherlands)


अब लंदन को अलविदा कहने का समय आ गया था। हमने अपने अगले पड़ाव नीदरलैण्ड के शहर 'द हेग' के लिए बस के द्वारा प्रस्थान किया। हमें इंग्लिश चैनल पार करके फ्रांस के शहर केलिस पहुंचना था। हमने डूवर नामक पोर्ट से फेरी (जहाज) में बस सहित चैनल को पार किया। द हेग में 'ग्लोबल हयूमन राईट्स डिफेन्स' (जीएचआरडी ) नामक संस्था तथा द हेग विश्वविद्यालय ने हमारी मेजबानी की। सर्वप्रथम जीएचआरडी ने हमारे लिए औपचारिक स्वागत समारोह का आयोजन किया जिसमे संस्था के द्वारा दक्षिण -पूर्वी एशिया तथा कश्मीर मे उनके द्वारा मानवाधिकार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे मे विस्तारपूर्वक उद्बोधन दिया गया। अगले दिन हेग विश्वविद्यालय में हमारा स्वागत किया गया। विवि विधि विभाग के प्रमुख डॉं रिचर्ड ने अपने उद्बोधन मे बताया कि विवि में १०० से भी अधिक देशों से छात्र अध्ययन करने आते है तथा ज्ञान की विविधता ही इस विवि को अलग दर्जा दिलाता हैं। उन्होने बताया कि हेग शहर मे इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टीस, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट तथा पीस पैलेस की उपस्थिति के कारण विश्व में इसे विधि एवं न्याय का केन्द्र बिन्दु माना जाता है।